अगली आयत क्विज़: सूरह Al-Kahfi
سُورَةُ الكَهۡفِ
- सूरह क्रमांक
- 18
- आयतों की संख्या
- 110
- प्रकार
- मक्की
पारा 15-16 में स्थित।
सूरह Al-Kahfi मुसहफ़ में सूरह क्रमांक 18 है, मक्की है और इसमें 110 आयतें हैं। इस पन्ने की क्विज़ आपको आयत-दर-आयत आगे बढ़ने का अभ्यास कराती है। नतीजे आपके डिवाइस में सहेजे जाते हैं, ताकि आप देख सकें कि कौन-सा हिस्सा दोबारा देखना बाकी है।
शुरुआती आयतें
-
ٱلْحَمْدُ لِلَّهِ ٱلَّذِىٓ أَنزَلَ عَلَىٰ عَبْدِهِ ٱلْكِتَٰبَ وَلَمْ يَجْعَل لَّهُۥ عِوَجَا ۜ
1. हर तरह की तारीफ ख़ुदा ही को (सज़ावार) है जिसने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर किताब (क़ुरान) नाज़िल की और उसमें किसी तरह की कज़ी (ख़राबी) न रखी
-
قَيِّمًۭا لِّيُنذِرَ بَأْسًۭا شَدِيدًۭا مِّن لَّدُنْهُ وَيُبَشِّرَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ٱلَّذِينَ يَعْمَلُونَ ٱلصَّٰلِحَٰتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا حَسَنًۭا
2. बल्कि हर तरह से सधा ताकि जो सख्त अज़ाब ख़ुदा की बारगाह से काफिरों पर नाज़िल होने वाला है उससे लोगों को डराए और जिन मोमिनीन ने अच्छे अच्छे काम किए हैं उनको इस बात की खुशख़बरी दे की उनके लिए बहुत अच्छा अज्र (व सवाब) मौजूद है
-
مَّٰكِثِينَ فِيهِ أَبَدًۭا
3. जिसमें वह हमेशा (बाइत्मेनान) तमाम रहेगें